आलू में कौन सा खाद दिया जाता है? | आलू की खेती के लिए खाद| Aalu Me Kon Sa Khad Diya Jata He

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हेल्लो किशान भाईयो ikhedutputra.Com में आप सब का हार्दिक स्वागत है। आज के इस आर्टिकल आलू में कौन सा खाद दिया जाता है? (Aalu Me Kon Sa Khad Diya Jata He) इस लेख में आलू की खेती की संपूर्ण माहिती की बात करेंगे। आलू की सब्जी हर घर में बनती होगी।

आलू का सब्जियों में एक महत्वपूर्ण स्थान है। आलू में से तरकारी, वेफर, पकोड़ी, चोट, पापड़, चिप्स, भजिया, और कुरकुरे इन सभी वानगी में आलू का उपयोग भरपूर मात्रा में किया जाता है। और इन सभी वानगी खाने में स्वादिष्ट होती है।

आलू में कई तत्व एवं कार्बोहाइड्रेट और विटामिन भी पाए जाते है। इन के अलावा प्रोटीन, एमिनो अम्ल जैसे ट्रिप्टोफेन, आइसोल्यूसीन आदि भरी मात्रा में मौजूद होते है। इस के कारण आलू की बाजार में साल भर बहुत मांग रहती है। इस लिए आलू की खेती आज के ज़माने में बहुत किशान करते है और काफी मुनाफा भी प्राप्त करते है।

आलू की फसल हमारे देश भारत में कई राज्य में किशान करते है इन में से उतर प्रदेश, पंजाब, तामिलनाडु, एवं गुजरात के कई विस्तार में आलू की खेती करते है और अच्छा मुनाफा भी करते है

Aalu Me Kon Sa Khad Diya Jata He
आलू में कौन सा खाद दिया जाता है? | Aalu Me Kon Sa Khad Diya Jata He

आज के इस आर्टिकल में आलू की खेती में कैसी मिट्टी की आवश्यकता होती है। आलू की फसल को अनुरूप जलवायु एवं तापमान आलू की उन्नत किस्मे आलू की बुवाई कैसे करे।

आलू में कौन सा खाद दिया जाता है? (Aalu Me Kon Sa Khad Diya Jata He) बात करे तो आलू की खेती की संपूर्ण जानकारी आप को इस आर्टिकल के अंत तक मिल जाएगी। इस लिए आप को इस आर्टिकल के अंत तक हमारे साथ बने रहना होगा।

Table of Contents

आलू के लिए कौन सी मिट्टी अच्छी है?

आलू की फसल सभी प्रकार की मिट्टी में की जाती है लेकिन अच्छी उपज या अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए आलू की फसल बलुई दोमट या रेतीली मिट्टी में करनी चाहिए।

आलू की खेती खरास नमक वाली मिट्टी में अच्छी उपज नहीं मिलती इस लिए खार या नमक वाली मिट्टी में नहीं करनी चाहिए। आलू की खेती जीस मिट्टी में करे उस मिट्टी का पी एच मान 5.5 से 7.5 के बिच का होना चाहिए।

आलू के लिए जमीन कैसे तैयार की जाती है?

आलू के लिए जमीन तैयारी अच्छे से करनी चाहिए। आलू की खेती करने के लिए दो से तीन बार गहरी जुताई कर के जमीन को भुरभुरी कर लेनी चाहिए।

और पाटा भी चला के जमीन को समतल कर लेना चाहिए बाद में नोफरा से दो बेड तैयार करना चाहिए। इन के बाद मेंड़ और खालियों वाले तरीके से या तो समतल बैडों वाले तरीके से आलू की बुवाई कर शकते है।

आलू के लिए कौन सी जलवायु सबसे अच्छी है?

आलू की खेती विभिन राज्य में उचित जलवायु में करते है। आलू की खेती में मध्यम शीतल जलवायु की आवश्यकता होती है। आलू की फसल आम तो साल भर किशान करते है लेकिन ज्यादा गर्मी के मौसम में आलू की खेती अच्छे से उपज नहीं मिलती। आलू की खेती में जल निकास की वयवस्था अच्छी होनी चाहिए।

आलू की फसल के लिए कितना तापमान उचित होता है?

आलू की फसल के लिए 10°C से 25°C तक का तापमान उचित होता है। और आलू के पौधे की अच्छी विकास के लिए 10°C से 15°C तक का तापमान अच्छा माना जाता है। आलू के कंद की अच्छी विकास के लिए 15°C से 21°C तक का तापमान सर्वोत्तम माना जाता है।

आलू की खेती में जब तक कंद वृद्धि नहीं करता तब तक तापमान अधिक होने से कोई नुकशान नहीं होता पर आलू के पौधे में कंद बड़े होने लगे तब अधिक तापमान से बहुत नुकशान होता है।

आलू का पौधा अधिक 25°C से 30°C तक का तापमान सहन कर शकता है इन से ऊपर का तापमान आलू की फसल को नुकशान पहुंचाता है

आलू की किस्में कौन कौन सी है?

आलू की खेती में आलू की कई सारी उन्नत (प्रसिद्ध) किस्मे है। आलू की उन्नत किस्मे के नाम कुस इस प्रकार के है।

कुफरी अशोक, कुफरी अलंकार, कुफरी बादशाह, कुफरी पुखराज, कुफरी सूर्या, कुफरी बहार, कुफरी ज्योति, कुफरी अरुण, कुफरी चमत्कार, कुफरी कंचन, कुफरी चिप्सोना 1,2,3, कुफरी लालिमा, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी जवाहर, कुफरी पुष्कर, कुफरी सुतलेज, कुफरी सिंधुरी, कुफरी फरीसोना इन के अलावा भी आलू की कई सारी प्रसिद्ध किस्मे है।

  • कुफरी अशोक : इस किस्मे के आलू सफ़ेद रंग के होते है। और इस किस्मे के आलू 80 से 90 दिन में पक के तैयार हो जाते है। इस किस्मे की बुवाई एक हेक्टर में करे तो लगभग 300 से 340 क्विंटल तक की उपज प्राप्त कर शकते है
  • कुफरी अलंकार : इस किस्मे की आलू के पौधे बड़े और मोटे तने वाले होती है। इस किस्मे के आलू का आकर गोलाकार होता है। इस किस्मे की बुवाई मैदानी विस्तार में और पहाड़ी विस्तार दोनों में किशान करते है और इस किस्मे के आलू 90 से 130 दिन में पक के तैयार हो जाते है। इस किस्मे की बुवाई एक हेक्टर में करे तो उपज 100 से 120 क्विंटल तक की प्राप्त कर शकते है।
  • कुफरी बादशाह : इस किस्मे के आलू के पौधे लम्बे और 4 से 6 तने के होते है। इस किस्मे के आलू साईज में बड़े और सफेद रंग के होते है। इस के आलू बड़े स्वादिष्ट होते है। इस किस्मे के आलू 80 से 100 दिन में पक के तैयार हो जाते है। इस किस्मे की एक खाशयत है की कोहरे रोग, झुलस रोग के सामने प्रतिरोधक होते है
  • कुफरी पुखराज : इस किस्मे के आलू सफेद रंग के होते है और इस आलू के गूदा पीले रंग का होता है। इस किस्मे के आलू 80 से 90 दिन में पक के तैयार हो जाती है। इस किस्मे की खेती एक हेक्टर में की है तो 370 से 400 क्विंटल तक की उपज प्राप्त कर शकते है।
  • कुफरी सूर्या : इस किस्मे के आलू सफेद रंग के होते है और ए किस्मे जल्द पक के तैयार हो जाती है। इस किस्मे के आलू 80 से 90 दिन में पक के तैयार हो जाते है। इस किस्मे की बुवाई एक हेक्टर में की है तो उपज 250 से 300 क्विंटल तक की प्राप्त होती है
  • कुफरी बहार : इस किस्मे के आलू के पौधे लम्बे और तने मोठे होते है। इस किस्मे के आलू सफेद रंग के होते है और आकार गोलाकार एवं अंडाकार के और साईज में बड़े होते है। इस किस्मे के आलू 80 से 100 दिन में पक के तैयार हो जाते है इस किस्मे की बुवाई एक हेक्टर में करे तो 100 से 130 क्विंटल तक की उपज प्राप्त कर शकते है। इस किस्मे के आलू अधिक दिन तक स्टोर कर शकते है।
  • कुफरी ज्योति : इस किस्मे के आलू 90 से 130 दिन में पक के तैयार हो जाते है। इस किस्मे के आलू सब से अच्छे प्रकार के आलू माना जाता है। इस किस्मे के आलू की खेती एक हेक्टर में की है तो उपज 180 से 230 क्विंटल तक की प्राप्त हो शक्ती है। और इस किस्मे के आलू ज्यादा तर बिहार एवं झारखंड और बंगाल राज्य में होता है।
  • कुफरी अरुण : इस किस्मे के आलू लाल रंग के होते है। इस किस्मे का आलू 90 से 100 दिन में पक के तैयार हो जाते है। इस किस्मे की बुवाई एक हेक्टर में की है तो 360 से 400 क्विंटल तक का उपज प्राप्त कर शकते है
  • कुफरी चमत्कार : इस किस्मे के आलू के पौधे फैलते बहुत है और तने भी अधिक होते है। इस किस्मे के आलू मैदानी विस्तार में और पहाड़ी विस्तार में बुवाई करते है। के आलू 110 से 130 दिन में पक के तैयार हो जाते है। इस की बुवाई एक हेक्टर में की हे तो 100 से 130 क्विंटल तक की उपज प्राप्त कर शकते है।
  • कुफरी कंचन : इस किस्मे के आलू के रंग लाल होते है और ए किस्मे के आलू 90 से 100 दिन में पक के तैयार हो जाते है। इस किस्मे के आलू की खेती एक हेक्टर में करे तो 310 से 350 तक की उपज प्राप्त कर शकते है

आलू की बुवाई कब की जाती है

आलू की बुवाई सितम्बर एवं अक्टूबर और नवंबर मास में करते है। आलू की बुवाई दो तरीके से कर शकते है। आलू की खेत की गहरी जुताई के बाद एक मेंड़ और खालियों वाले तरीके से या तो समतल बैडों वाले तरीके से आलू की बुवाई कर शकते है। आलू के बीज दर आलू के वजन पर निर्भर रखता है।

आलू के कंद 10 ग्राम या 20 ग्राम के आलू की बुवाई की है तो एक हेक्टर में से 10 क्विंटल या 20 क्विंटल तक की उपज प्राप्त होती है। आलू की बुवाई करने से पहेले इस आलू का उपचार जरूर करे। आलू को कोल्ड स्टोरेज की योग्य मात्रा से उपचार करना चाहिए। बाद में मुख्य खेत में बुवाई कर शकते है।

आलू की खेती में सिंचाई कब करें

आलू की फसल में सिंचाई की आवश्यकता बहुत नहीं करनी चाहिए। आलू के बीज बुवाई के बाद एक सिंचाई अवश्य करे ताकि आलू अंकुरित अच्छे से हो जाए। आलू की फसल में सिंचाई 4 से 5 बार करनी चाहिए।

आलू के बुवाई के बाद और बुवाई से 10 से 13 दिन बाद और 30 से 35 दिन बाद और जब आलू की कटाई से 10 से 15 दिन पहेले सिंचाई बंध कर देनी चाहिए। नहीं तो कटाई के बाद आलू पर मिट्टी छिपक जाती है

आलू में कौन सा खाद दिया जाता है? (Aalu Me Kon Sa Khad Diya Jata He)

आलू की फसल में योग्य समय खाद देना बेहद जरूरी है। आलू के पौधे की अच्छी विकास एवं आलू की अच्छी उपज के हेतु। आलू की खेती में इस प्रकार के खाद देना चाहिए। एक हेक्टर की मात्रा से अच्छे से सड़ी गोबर 13 से 15 टन, यूरिया 125 किलोग्राम, म्यूरेट 85 किलोग्राम, पोटाश 130 किलोग्राम, जल सल्फेट 12 किलोग्राम, फेरस सल्फेट 25 किलोग्राम, फोरेट 10 जी 12 किलोग्राम,

इन के अलावा नाइट्रोजन 160 से 180 किलोग्राम, फास्फोरस 55 से 60 किलोग्राम, पोटाश 50 से 60 किलोग्राम, और एसएसपी 80 से 90 किलोग्राम की मात्रा में दिया जाता है। आलू की फसल में इस प्रकार की खाद दिया जाता है और आलू के पौधे के साथ साथ आलू के भी अच्छे से विकास होता है और अच्छी उपज किशान प्राप्त करते है।

आलू में खरपतवार नाशक सबसे अच्छी दवाई कौन सी है?

आलू की फसल में योग्य समय पर खरपतवार नियंत्रण करनी चाहिए। आलू की फसल में खरपतवार नियंत्रण दो प्रकार से कर शकते है एक खुरपी चलाके और रासायनिक दवाई के इस्तेमाल कर के इन में से खुरपी चलाके निदाई गुड़ाई करने से मिट्टी को हवा मिलती है और आलू के पौधे की अच्छी विकास होती है।

रासायनिक दवाई प्रेटीलाफ्लोर 1250 मिलि प्रति हेक्टेयर के मान से छिड़काव करें। आलू की खेती में निदाई गुड़ाई खुरपी से करना अच्छा होता है।

आलू की फसल में कौन कौन से रोग लगते हैं?

आलू की खेती में कई प्रकार की रोग एवं किट अटेक करते है। और इस रोग एवं कीट का सही समय पर उपचार करना चाहिए। नहीं तो उपज में भारी गिरावट देखने को मिलेगी। आलू की फसल में इस प्रकार के रोग एवं कीट ज्यादा तर दिखाई देते है।

चेपा, झुलसा रोग, कुतरा सुंडी, लाही जैसे रोग, पत्ते खाने वाली सुंडी, काली रुसी ब्लैक स्कर्फ, लाल भुंडी, सफेद सुंडी, आलू का कीड़ा, अगेता झुलस रोग, आलुओं पर काले धब्बे, पिछेता झुलस रोग, आलुओं पर काली परत, नर्म होकर गलना, चितकबरा रोग, इन रोग एवं कीट का उपचार जल्द से जल्द करना चाहिए।

इन रोग एवं कीट का नियंत्रण कैसे करे?

आलू की फसल में रोग एवं कीट से नियंत्रण इस प्रकार से कर शकते है।

  • चेपा : इस कीट के कारण मुख्य फसल के पतों ऊपर की दिशा में मोड़ जाते है। और पतिया पीले रंग की हो जाती है या दिखती है। इस कीट का मुख्य कार्य है पतिया में रस है वही रस को चूस लेते है। इस कारण पतिया ऊपर की दिशा में मोड़ जाती है।
  • नियंत्रण : इस कीट के नियंत्रण के लिए हमे ए उपचार करना होगा थाइमैथोक्सम 5 ग्राम 16 लीटर पानी में मिलाके छिटकाव करना होगा। और इस छिटकाव के बाद 10 से 15 दिन में डाइमैथोएट 10 मि.ली. + टराइडमोरफ 10 मिली दोनों को 16 लीटर पानी में मिलाके छिटकाव करना होगा।
  • झुलसा रोग : इस रोग को मुख्य तवे बारिश के मौसम में दिखाइ देते है। इस बीमारी को पतों एवं पतों के निचले हिच्छे में दिखाई देते है। इस रोग से प्रभावित पतों पर धब्बे दिखाई देते है और सफ़ेद पावडर बन जाता है। इस रोग का अटेक होने से तुरंत योग्य दवाई का छिड़काव करना चाहिए नहीं तो उपज में 50% नुकशान हो शकता है
  • नियंत्रण : इस बीमारी के नियंत्रण के लिए प्रॉपीनेब 30 ग्राम 16 लीटर पानी में मिल घोल के छिड़काव करना चाहिए। और जब आलू की बुवाई करे तब बीमारी मुक्त बीज का ही उपयोग करना चाहिए।
  • कुतरा सुंडी : आलू के पौधे अंकुरित हो के जब वृद्धि करते है तब ए सुंडी अटेक करती है और नुकशान भी अधिक पहुचाती है। इस सुंडी का अटेक साम ढलने के बाद अटेक करती है। इसी लिए तो इस सुंडी को रोकना बहुत कठिन है। इस सुंडी का अटेक कम हो इस लिए सुंडी की खाद देनी चाहिए।
  • नियंत्रण : इस सुंडी का अटेक दिखाई दे तब क्लोरपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ई सी 30 ग्राम 16 लीटर पानी में मिलके छिड़काव करना चाहिए। इन के अलावा क्विनलफॉस 25 ई सी 30 ग्राम 16 लीटर पानी में मिलके छिड़काव करना चाहिए।
  • पत्ते खाने वाली सुंडी : इस सुंडी से आलू के पौधे को ज्यादा नुकशान होता है। इस सुंडी का कार्य है पौधे के ताजे हरे और नाइ अंकुरित तने को खाते है। और पौधे का विकास रूक जाता है।
  • नियंत्रण : इस हरी सुंडी के नियंतरण में हम यूपीएल कम्पनीका उलाला फलेको मिड 50% SG 7 से 8 ग्राम 16 लीटर पानी के साथ 15 दिन में दो से तीन छिटकाव करना चाहिए।
  • रंग बे रंगी सुंडिया : इस सुंडी को पौधे के पतों एवं फूल फल सभी के ऊपर अटेक करते है। इस का कार्य है पतों को खाना फूल फल को खाना और नष्ट करना। इस के कारण किशान को भारी नुकशान भुगतना पड़ता है।
  • नियंत्रण : इस सुंडी का नियंत्रण जल्द करना चाहिए इस के उपचार में आप एक्यूरेट कम्पनी का अटैक प्लस इमामेकेटिन बेंजोएट टेक्नीकल्स 2.00% W/W बलायक 33.00% W/W मिथाइल पाईरोलीडॉन 28.70% W/W 20 से 25 मिलीग्राम 16 लीटर पानी में मिला के छिटकाव करना चाहिए।
  • लाल भुंडी सफेद सुंडी : इस भुंडी का अटेक आलू के पतों पर होता है। नाइ अंकुरित पतों को ज्यादा नुकशान पहुंचाते है। और सफ़ेद भुंडी मिट्टी के अंदर रहती है। ए भुंडी आलू के जड़ो पतों और आलू को खाते है।
  • नियंत्रण : इस हरी इली के उपचाई में हम एक्यूरेट कम्पनी का अटैक प्लस इमामेकेटिन बेंजोएट टेक्नीकल्स 2.00% W/W बलायक 33.00% W/W मिथाइल पाईरोलीडॉन 28.70% W/W 20 से 25 ऐ मेल 16 लीटर पानी में मिला के छिटकाव करना चाहिए।
  • आलू का कीड़ा : इस कीट के कारण बहुत नुकशान होता हे रजनीगंधा के पौधे में इस कीट का मुख्य कार्य हे इन पौधे की सखा को और नई अंकुरित पतों को कहते है और नष्ट कर देते है।
  • नियंत्रण : इस के नियंत्रण में हम कोरोमंडल कंपनी का साइपरकिल 25 % ई.सी. साइपमेंथ्रिन 25 ई.सी. 35 मिलीग्राम + फेन्डल 50 % E.C इस का मान 40 मिलीग्राम 16 लीटर पानी में मिलके छिटकाव करना चाहिए।
  • अगेता झुलस रोग : इस रोग से अटेक से पतों पर धब्बे दिखाई देते है। इस रोग का लगने का कारण हे मिट्टी में फंगस होना। इस रोग को शर्दी के मौसम में और ज्यादा पानी भराव स्थिति में दिखाई देता है
  • नियंत्रण : इस के नियंत्रण में एक ही जगह बारबार एक ही फसल नहीं करनी चाहिए। फसल चक्र बदल ते रहना चाहिए। इस के अटेक दिखे तब मैनकोजेब 30 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 30 ग्राम 16 लीटर पानी में मिलके छिटकाव करना चाहिए।
  • नर्म होकर गलना : इस रोग के अटेक से आलू के पौधे के पतों काले रंग के हो जाते है और आलू भी भूरे रंग के हो जाते है। इस के ज्यादा प्रभावित पौधे धीरे धीरे सुख के नष्ट हो जाते है। इस से अटेक से आलू भी लाल रंग के धब्बे दिखाई देते है।
  • नियंत्रण : इस के नियंत्रण में स्वछ और बीमारी रहित आलू की बुवाई करनी चाहिए। आलू के बीज की बुवाई से पहले आलू के बीज का उपचार बोरिक एसिड की अच्छी मात्रा से करनी चाहिए इन के अलावा कार्बेनडाज़िम 1 प्रतिशत से 15 मिनट के लिए उपचार करें।

आलू की खुदाई एवं उपज एक हेक्टर में से कितनी प्राप्त होगी?

आलू की फसल में उपज अधिक मिलती है। अगर एक हेक्टर में आलू की फसल की है तो 370 से 400 क्विंटल तक की उपज प्राप्त कर शकते है। आलू की फसल में खुदाई आलू पूरी तरह से पक जाए तब करनी चाहिए और आलू के बुवाई से 60 दिन एवं 80 दिन एवं 110 दिन के बाद कर शकते है।

आलू की खुदाई हो जाने के बाद आलू को चाव में रखना चाहिए। धुप में रखने से आलू बिगड़ जाते है।

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FAQ’s

Q-1. आलू की बुवाई किस महीने में की जाती है?

Answer : आलू की बुवाई सिंतबर अक्टूबर और नवम्बर मास में की जाती है। आलू की खेती शर्दी के मौसम में करते है।

Q-2. आलू का खेती कितने दिन में तैयार हो जाता है?

Answer : आलू का खेत 80 से 90 दिन में तैयार हो जाता है। तो कई किस्मे आलू की 90 से 130 दिन में पक के तैयार हो जाते है।

Q-3. एक हेक्टर में आलू की उपज कितनी प्राप्त होती है?

Answer : एक हेक्टर में आलू की फसल की है तो 370 से 400 क्विंटल तक की उपज प्राप्त कर शकते है।

Q-4. आलू की अधिक पैदावार कैसे करें?

Answer : आलू की अधिक पैदावार लेने के लिए आलू की फसल में योग्य समय पर खाद देना चाहिए और कोई रोग एवं कीट का अटेक दिखे तब योग्य दवाई का छिड़काव करना चाहिए।

Q-5. आलू बोने के बाद कितने दिन में पानी देना चाहिए?

Answer : आलू की फसल में आलू की अच्छी उपज के लिए योग्य समय पर खाद देना चाहिए और खाद देने से पानी की आवश्यकता अधिक होती है आलू की बुवाई के बाद एक सिंचाई करनी चाहिए और इन के बाद 30 से 35 बाद और आलू की फसल में नमी बनी रहे इस लिए योग्य समय पर सिंचाई करते रहनी चाहिए।

सारांश

नमस्ते किशान भाईयो इस आर्टिकल के माध्यम से आपको आलू में कौन सा खाद दिया जाता है? (Aalu Me Kon Sa Khad Diya Jata He) इन के बारे में बारीक़ से जानेगे और आलू की खेती के लिए कैसी मिट्टी की पसंदगी करनी चाहिए, आलू के पौधे को कैसा जलवायु एवं तापमान अनुकूल होता है,

आलू के बीज कब बुवाई करे, आलू की उन्नत (प्रसिद्ध) किस्मे के नाम, आलू की फसल में कौन कौन सा रोग एवं कीट अटेक करते है, और इन रोग एवं कीट के नियंत्रण कैसे करे और आलू की खेती एक हेक्टर में करे तो किशान कितनी उपज प्राप्त कर शकते है।इस आर्टिकल में आलू की खेती की संपूर्ण जानकारी मिल जाएगी।

हमे पता है की ए आर्टिकल आप को आलू की खेती के लिए बहुत हेल्पफुल होगा। और ए आर्टिकल आपको बहुत पसंद भी आया होगा इस लिए इस आर्टिकल को अपने सबंधी एवं मित्रो और किशान भाई को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। इस आर्टिकल के अंत तक बने रहने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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नमस्कार किसान मित्रो, में Mavji Shekh आपका “iKhedutPutra” ब्लॉग पर तहेदिल से स्वागत करता हूँ। मैं अपने बारे में बताऊ तो मैंने अपना ग्रेजुएशन B.SC Agri में जूनागढ़ गुजरात से पूरा किया है। फ़िलहाल में अपना काम फार्मिंग के साथ साथ एग्रीकल्चर ब्लॉग पर किसानो को हेल्पफुल कंटेंट लिखता हु।

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