इस घोल का इस्तेमाल फसल पर करने से उत्पादन होगा ताबडतोब और कमाई होगी तगड़ी

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Jivamrit Ghol Taiyar Karne Ki Vidhi

जीवामृत घोल तैयार करने की विधि (Jivamrit Ghol Taiyar Karne Ki Vidhi) : जीवामृत कोई खाद या दवाई नहीं है। जीवामृत एक विशाल सूक्ष्म जीवाणुओं का समूह है। यह जीवामृत का इस्तेमाल करने से जमीन को जरूरी पोषक तत्व मिल जाते है। इन की मदद से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की गतिविधि बड़ी तेजी से बढ़ जाती है।

जीवामृत की मदद से पेड़ पौधे और फसल को कवक और कई जीवाणु की वजे से लगने वाला रोग और बीमारी के सामने भी सहनशील बनता है। और कई बीमारी और रोग से फसल को बचाया जा शकता है। यह सूक्ष्म जीवाणु पौधे के लिए भोजन बनाने का कार्य करता है। आज के इस ikhedutputra.Com के इस आर्टिकल के माध्यम से हम जानेंगे की जीवामृत घोल तैयार करने की विधि (Jivamrit Ghol Taiyar Karne Ki Vidhi) क्या है और कैसे त्यार होता है।

जीवामृत घोल तैयार करने की विधि (Jivamrit Ghol Taiyar Karne Ki Vidhi)

जीवामृत घोल तैयार करने के लिए आप को कुछ सामग्री की जरूरत होगी इन की मदद से आप जीवामृत घोल बड़ी आसानी से तैयार कर शकते है और इन के घोल का इस्तेमाल फसल पर करने से पौधे की विकास अधिक होती है साथ में इन का उत्पादन भी बंपर प्राप्त होता है इस लिए कमाई भी तगड़ी होती है।

जीवामृत तैयार करने के लिए सामग्री

  • जीवामृत तैयार करने के लिए देशी गाय का गोबर 2 से 2.5 किलोग्राम
  • देशी गाय का यानि के गौवमुत्र 2 से 2.5 लीटर
  • गुड़ या तो आप मीठे फल का गूदा 200 से 250 ग्राम
  • किसी दलहन का या तो बेसन का आटा 200 से 250 ग्राम
  • जंगल की मिट्टी या तो खेत की मिट्टी 5 से 10 ग्राम

जीवामृत तैयार करने के लिए आप को 40 लीटर पानी ड्रम में भरना है इस में आप को गाय का गोबर, गौवमुत्र, बेसन का आटा और गुड़ डालना है बाद में मिट्टी भी दाल देनी है। इन के बाद इस ड्रम में लकड़ी का बड़ा डंडा लेकर इस को घडी की तरह गोल गोल घुमाना है। इस घोल को कम से कम तीन दिन तक सुबह और शाम के समय गोल गोल घुमाना है। और यह 3 से 4 मनिट तक घूमना है। इन के बाद जब 3 दिन हो जाता है तब यह घोल पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाता है। इस घोल को आप ड्रिप या स्प्रिंकलर विधि से इस्तेमाल करना है तो आप को इस घोल को 2 से 3 बार किसी कपडे की मदद से छान लेना है।

जीवामृत के फायदे

फसल में जीवामृत का इस्तेमाल करने से पौधे को जरुरी पोषक तत्व मिल जाता है। जमीन में सूक्ष्म जीवाणुओं और मित्रकीटों की संख्या में वृद्धि होती है। और सब्जी एवं फल के पौधे की वृद्धि अधिक होती है इन के अलावा पौधे पर लगने वाले फल की गुणवत्ता अच्छी होती है। जमीन की उर्वरक शक्ति अच्छी होती है। खट्टी लस्सी के साथ आप जीवामृत के घोल को अच्छे से मिला के फसल पर लगने वाले कई रोग और बीमारी के सामने दवाई के रूप में इस्तेमाल कर शक्ति है।

जीवामृत तैयार हो जाने के बाद कब तक इस्तेमाल करें

जीवामृत तैयार हो जाने के बाद आप 2 सप्ताह तक इस का उपयोग खेत में कर शकते है। अगर आप को एक बीघा जमीन में जीवामृत का प्रयोग करना है तो 40 लीटर के दर से करना है इन्हे आप छिड़काव कर के या तो सिंचाई के साथ भी कर शकते है। इन का इस्तेमाल एक बार करेंगे तो आप बाजार में मिलने वाला महगा खाद और दवाई इस्तेमाल करना भूल जाएंगे इन से कुछ रकम की बचत होगी और कम लागत में अधिक उत्पादन और अच्छ कमाई होगी।

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आज के इस आर्टिकल में हम ने आप को जीवामृत घोल तैयार करने की विधि (Jivamrit Ghol Taiyar Karne Ki Vidhi) इन के बारे में अच्छी जानकारी बताई है। कम लागत में अधिक मुनाफा यह आर्टिकल आप को सेम की खेती के लिए बहुत हेल्फ फूल होगा और यह आर्टिकल आप को पसंद भी आया होगा ऐसी हम उम्मीद रखते है। और इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा किसान भाई और अपने मित्रो को शेयर करे।

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नमस्कार किसान मित्रो, में Mavji Shekh आपका “iKhedutPutra” ब्लॉग पर तहेदिल से स्वागत करता हूँ। मैं अपने बारे में बताऊ तो मैंने अपना ग्रेजुएशन B.SC Agri में जूनागढ़ गुजरात से पूरा किया है। फ़िलहाल में अपना काम फार्मिंग के साथ साथ एग्रीकल्चर ब्लॉग पर किसानो को हेल्पफुल कंटेंट लिखता हु।

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