किसान पर होगी नोटों की बारिश तोरई की खेती इस तकनीक से करें।

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Turai Kon Se Mahine Me Lagai Jati Hai

तोरई कौन से महीने में लगाई जाती है? (Turai Kon Se Mahine Me Lagai Jati Hai) : हमारे देश के कई राज्य में तोरई की खेती किसान करते है और इस तोरई को कई नाम से लोग जानते है। जैसे की तोरी, झिंग्गी और तुरई, आदि ननम से लोग जानते है। तोरई एक सब्जी वर्गी फसल है जिन के पौधे लता के रूप में बढ़ते है।

तोरई के पौधे पर पीले रंग के फूल खिलते है। ज्यादातर किसान तोरई की खेती बारिश के मौसम में करते है। पर कुछ किसान ऐसे भी है जो तोरई की खेती ग्रीष्मकालीन ऋतु में भी करते है और अच्छा उत्पादन के साथ अच्छी कमाई करते है। गर्मी के मौसम में मार्केट में कई सब्जी की आय कम होती है इस लिए मार्केट में जो भी सब्जी आती है इन का भाव अच्छा मिलता है।

आज के इस ikhedutputra.Com के इस आर्टिकल के माध्यम से हम तोरई की खेती कैसे करें और अधिक उत्पादन के साथ अच्छी कमाई प्राप्त कैसे करें इन के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करेंगे। इस लिए आप हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक बने रहे।

तोरई कौन से महीने में लगाई जाती है? (Turai Kon Se Mahine Me Lagai Jati Hai)

तुरई की खेती ज्यादातर बारिश के मौसम में की जाती है। तोरई बारिश के महीने में जुलाई महीने में और ग्रीष्मकालीन ऋतु में भी तोरई की खेती कर शकते है। तोरई की खेती आप किसी भी प्रकार की मिट्टी में कर शकते है। पर पौधे की अच्छी विकास के लिए इन के उन्नत किस्में के बीज आप कार्बनिक पदार्थ वाली बलुई दोमट मिट्टी में लगाए। तोरई की खेती में जल निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।

तोरई की फसल गर्म और आद्र जलवायु में सब से अच्छी विकास करती है और अच्छा उत्पादन भी देती है। इन की खेती में तापमान की बात करें तो 20℃ से 35℃ तक का अच्छा माना जाता है इन से अधिक तापमान पर उत्पादन और पौधे की लता भी प्रभावित हो शक्ति है।

तोरई की खेती में खेत की तैयारी

तोरई की खेती के लिए खेत को दो से तीन बार गहरी जुताई करें। बाद में धुप में कुछ समय तक ऐसे ही खेत को खुल्ला छोड़ देना चाहिए। बाद में एक हेक्टर के हिसाब से 13 से 15 टन गोबर की खाद डाले और मिट्टी में अच्छे से मिला देनी चाहिए। इन के अलावा आप एन.पी.के. 25 : 35 : 30 का भी इस्तेमाल कर शकते है। बाद में पत्ता चला के मिट्टी को समतल करें। बाद में 2 मीटर की दुरी पर 25 से 30 सैमी आकर के खड्डे खोद के तैयार करें। इन खड्डे में बीज की बुवाई कर के एक सिंचाई जरूर करें।

तोरई की उन्नत किस्में

तोरई की उन्नत किस्में हमारे कृषि वैज्ञानिकों ने कई सारी विकसित की है जो अधिक उत्पादन के लिए जानी जाती है। अंकुर लतिका, पूसा स्नेहा, फुले प्रजतका, सरपुतिया, कल्याणपुर चिकनी, पूसा चिकनी, काशी दिव्या, कोयम्बू- 2 इन से भी आदि तोरई की उन्नत किस्में बाजार में उपलब्ध है। तोरई के बीज की बुवाई करने से पहले बीज उपचार जरूर करें। तोरई के एक किलोग्राम बीज को ट्राइकोडर्मा विराइड 4 ग्राम या स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस 10 ग्राम की मात्रा से उपचारित करें।

तोरई की खेती में खरपतवार का नियंत्रण करना चाहिए इन से तोरई की खेती में कई रोग और कीट अटैक करते है इन के नियंत्रण के लिए योग्य दवाई का छिड़काव करे। और सिंचाई की बात करें तो बारिश के दिनों में अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं होती है पर गर्मी के मौसम में तोरई की खेती में सिचाई 4 से 6 दिन के अंतर में करनी चाहिए। यह सिंचाई मिट्टी पर निर्भर है।

तोरई की उन्नत किस्में के बीज लगाने के बाद 55 से 60 दिन में पहले तुड़ाई कर शकते है। पर बीज प्राप्त करने के लिए तोरई की खेती की है तो आप को इन तोरई को अच्छे से पल के सुख जाने तक इंतजार करना होगा। तोरई की खेती में अच्छे से दिखभल करे तो एक हेक्टर से 100 से 150 क्विंटल रक् उत्पादन प्राप्त होता है।

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आज के इस आर्टिकल में हम ने आप को तोरई कौन से महीने में लगाई जाती है? (Turai Kon Se Mahine Me Lagai Jati Hai) इन के बारे में अच्छी जानकारी बताई है। यह आर्टिकल आप को सेम की खेती के लिए बहुत हेल्फ फूल होगा और यह आर्टिकल आप को पसंद भी आया होगा ऐसी हम उम्मीद रखते है। और इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा किसान भाई और अपने मित्रो को शेयर करे।

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नमस्कार किसान मित्रो, में Mavji Shekh आपका “iKhedutPutra” ब्लॉग पर तहेदिल से स्वागत करता हूँ। मैं अपने बारे में बताऊ तो मैंने अपना ग्रेजुएशन B.SC Agri में जूनागढ़ गुजरात से पूरा किया है। फ़िलहाल में अपना काम फार्मिंग के साथ साथ एग्रीकल्चर ब्लॉग पर किसानो को हेल्पफुल कंटेंट लिखता हु।

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