White Fly Control : व्हाईट फ्लाय कंट्रोल करने का धासु फॅार्मुला

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White Fly Control

व्हाईट फ्लाय कंट्रोल (White Fly Control) : नमस्कार किसान मित्रो आज के इस आर्टिकल में आप सभी किसान बंधू का तहेदिल से स्वागत करता हु और आज हम जानेंगे की किसी भी फसल में जब व्हाईट फ्लाय का अटैक होता है तब इन्हे कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। और व्हाईट फ्लाय का नियंत्रण जल्द से जल्द नहीं किया तो फसल को बर्बाद हो जाती है और किसान को भारी नुकशान होता है।

आज के इस ikhedutputra.Com के इस आर्टिकल के माध्यम से हम जानेंगे की व्हाईट फ्लाय कंट्रोल (White Fly Control) करने के लिए कौन सा स्प्रे करना होगा और कौन कौन सी दवाई का कोमिनेशन करना है और इन का 100 लीटर पानी में कितना नाप रखना है इन सभी बाते पर विस्तार से जानेंगे इस लिए आप हमारे साथ इस आर्टिकल के अंत तक बने रहे।

व्हाईट फ्लाय कंट्रोल (White Fly Control) करने का जबरदस्त फॅार्मुला

जब भी आप की फसल में वाइट फलाई का अटैक दिखाई दे तब आप को सब से पहले ड्रिप विधि से सिंचाई करते है तो या तो सीधी फसल की सिंचाई करते है तब भी चलेगा आप एक एकड़ के हिसाब से एसिटामाइड 500 ग्राम और एसी टामा प्रीड 500 ग्राम के दर से देना है। इन के साथ आप कोई फंगी साइड 1919 का ग्रेड ह्यूमिक एसिड फोलिक एसिड सिलिकॉन पाउडर दूध वगेरे भी दे शकते है।

1 फॅार्मुला : यह देने के बाद आप को छिड़काव के लिए उलाला 100 लीटर पानी में 30 ग्राम + पदान काटप हाइड्रो क्लोराइड 100 लीटर पानी में 100 ग्राम + शमीर टेपु कोनजल प्लस कैप्टन 100 लीटर पानी में 200 ML+ एनपीके का ग्रेड 12:61:00 या तो 13:40:13 100 लीटर पानी में 250 ग्राम इन सब का ऐसे डोज तैयार कर के अच्छे से घोल बना के फसल पर छिड़काव करें।

यह छिड़काव हो जाने के बाद 4 से 5 दिन बाद एक और छिड़काव करना है। वाइट फ्लाई का कंट्रोल एक छिड़काव से नियंत्रण नहीं होती है इस लिए आप को दूसरा छिड़काव 4 से 5 दिन बाद करना है। क्यों की वाइट फ्लाई के अटैक से फसल तनाव में रहती है। और तनाव में जब वाइट प्लाई अटैक कर देती है और हम फसल पर दवाई का छिड़काव करते है पर फसल पर तनाव की वजे से पौधे अच्छे से यूटिलाइज नहीं कर शकते है इस लिए एक छिड़काव से वाइट फ्लाई का नियंत्रण नहीं होता है।

2 फॅार्मुला : पेगासस जीस में डाफेन थिरन डाइफ थिरन + प्रोक्लेम जीस में इमाम क्टिन बेंजोइन + इंडेक्स इन को हम सिस्टन के नाम से भी जानते है। + कुमा नेल + एनपीके का ग्रेड 12:61:00 या तो 13:40:13 अब इन सभी दवाई का डोज 100 लीटर पानी के हिसाब से पेगसर 100 ग्राम और प्रोक्लेम 50 ग्राम और इंडेक्स 100 ग्राम और कुमा नल 250 ML और एनपीके 250 ग्राम के दर से 100 लीटर पानी में अच्छे से घोल बना के छिड़काव करना है।

यह फार्मूला अपना के आप किसी भी फसल में वाइट फलाई का नियंत्रण कर शकते है और अपनी फसल में होने वाले नुकशान से बचा के अच्छा उत्पादन और अधिक कमाई कर शकते है। यह दोनों फोर्मुला का रिजल्ट बढ़िया देखने को मिलेंगे।

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आज के इस आर्टिकल में हम ने आप को व्हाईट फ्लाय कंट्रोल (White Fly Control) इन के बारे में अच्छी जानकारी बताई है। कम लागत में अधिक मुनाफा यह आर्टिकल आप को सेम की खेती के लिए बहुत हेल्फ फूल होगा और यह आर्टिकल आप को पसंद भी आया होगा ऐसी हम उम्मीद रखते है। और इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा किसान भाई और अपने मित्रो को शेयर करे।

हमारे इस ब्लॉग ikhedutputra.com पर हर हमेेश किसान को खेती की विविध फसल के उन्नत बीज से लेकर उत्पादन और इन से होने वाली कमाई और मुनाफा तक की सारी बात बताई जाती है। इन के अलावा जो किसान के हित में सरकार की तरफ से चलाई जाने वाली विविध योजना और खेती के नई तौर तरीके के बारे में भी बहुत कुछ जानने को मिलेगा।

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नमस्कार किसान मित्रो, में Mavji Shekh आपका “iKhedutPutra” ब्लॉग पर तहेदिल से स्वागत करता हूँ। मैं अपने बारे में बताऊ तो मैंने अपना ग्रेजुएशन B.SC Agri में जूनागढ़ गुजरात से पूरा किया है। फ़िलहाल में अपना काम फार्मिंग के साथ साथ एग्रीकल्चर ब्लॉग पर किसानो को हेल्पफुल कंटेंट लिखता हु।

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